Divorce Lawyer in Jaipur – Jaipur Legal Solution

Divorce (तलाक) एक ऐसा निर्णय है जो जीवन में भावनात्मक और कानूनी दोनों रूप से जटिल होता है।
यह सिर्फ पति-पत्नी के बीच का अलगाव नहीं होता, बल्कि कई कानूनी, सामाजिक और पारिवारिक पहलुओं को साथ लेकर चलता है।

Jaipur Legal Solution, situated at 96, Agra Road, Prem Nagar, Jaipur, Rajasthan – 302031, provides expert legal assistance for all kinds of Divorce Cases — whether it’s Mutual Consent Divorce, Contested Divorce, or issues related to Child Custody, Maintenance, and Property Settlement.

हमारे अनुभवी Divorce Lawyers आपको कानूनी प्रक्रिया में सही मार्गदर्शन देते हैं और आपका केस संवेदनशीलता एवं गोपनीयता के साथ संभालते हैं।

What is Divorce?

Divorce का मतलब होता है – वैवाहिक संबंधों (Marriage) का कानूनी रूप से अंत।
कोर्ट के आदेश से पति-पत्नी के बीच शादी का बंधन खत्म किया जाता है, जिससे दोनों व्यक्ति स्वतंत्र रूप से नया जीवन शुरू कर सकते हैं।

Types of Divorce in India

भारत में तलाक के दो प्रमुख प्रकार हैं:

1. Mutual Consent Divorce (आपसी सहमति से तलाक)

जब पति-पत्नी दोनों आपसी सहमति से तलाक लेने का निर्णय लेते हैं।
यह प्रक्रिया सरल, कम समय लेने वाली और विवाद रहित होती है।
आमतौर पर यह 6 महीने से 1 वर्ष में पूरी हो जाती है।

2. Contested Divorce (विवादित तलाक)

जब एक पक्ष तलाक चाहता है लेकिन दूसरा पक्ष सहमत नहीं होता।
ऐसे मामलों में कोर्ट को तलाक देने के लिए ठोस कारणों की जांच करनी होती है।
यह प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है।

Grounds for Divorce under Indian Law

भारत में तलाक के कानूनी आधार (Grounds) निम्नलिखित हैं:

  1. Cruelty (क्रूरता) – शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न
  2. Adultery (व्यभिचार) – किसी तीसरे व्यक्ति से संबंध बनाना
  3. Desertion (परित्याग) – एक पक्ष द्वारा दूसरे को छोड़ देना
  4. Conversion (धर्म परिवर्तन)
  5. Mental Disorder (मानसिक विकार)
  6. Venereal Disease (संक्रामक रोग)
  7. Renunciation (संन्यास)
  8. Not Heard Alive for 7 Years (7 वर्षों से कोई सूचना न होना)

Legal Provisions for Divorce

तलाक से संबंधित प्रमुख कानून भारत में निम्नलिखित हैं:

  • Hindu Marriage Act, 1955
  • Special Marriage Act, 1954
  • Muslim Personal Law (Shariat) Application Act, 1937
  • Indian Divorce Act, 1869 (for Christians)
  • Parsi Marriage and Divorce Act, 1936

Divorce Process in India

Step 1: Filing the Petition

एक पक्ष या दोनों पक्ष मिलकर Divorce Petition Family Court में फाइल करते हैं।

Step 2: Notice to Respondent

दूसरे पक्ष को कोर्ट नोटिस भेजता है ताकि वह जवाब दे सके।

Step 3: Hearing and Evidence

दोनों पक्ष अपने बयान, साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं।

Step 4: Mediation & Counselling

कोर्ट दोनों को पुनर्मिलन (reconciliation) का मौका देता है।

Step 5: Court Order

अगर सुलह संभव नहीं होती, तो कोर्ट Divorce Decree जारी करता है।

Services We Provide

Jaipur Legal Solution में Divorce मामलों के लिए विशेषज्ञ सेवाएँ उपलब्ध हैं:

  • Mutual Consent Divorce Filing
  • Contested Divorce Cases
  • NRI Divorce Matters
  • Maintenance / Alimony Claims
  • Child Custody and Visitation Rights
  • Domestic Violence & Dowry Cases
  • Property & Financial Settlement

Required Documents for Divorce

  1. Marriage Certificate
  2. ID Proofs (Aadhaar / PAN)
  3. Passport size photographs
  4. Marriage Photos or Invitation Card
  5. Address Proof (both parties)
  6. Income Proof / Bank Statements
  7. Proof of living separately (if applicable)

Mutual Consent Divorce Benefits

  • No lengthy litigation
  • Time & cost saving
  • Privacy maintained
  • Emotional peace for both parties
  • Settlement of alimony and custody mutually

Contested Divorce Cases

In Contested Divorce, when one party refuses to give divorce, the court examines evidence and decides based on legal grounds.
These cases may involve allegations like cruelty, desertion, or domestic violence.

Our Divorce Lawyers in Jaipur ensure that your case is presented strongly with all legal documentation and representation in court.

Child Custody & Maintenance

Divorce के बाद बच्चों की Custody और Maintenance (पालन-पोषण भत्ता) सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है।
कोर्ट बच्चे के “Best Interest” को ध्यान में रखते हुए Custody तय करती है।

हम आपको Child Custody Petition, Visitation Rights और Maintenance Claim में पूरी कानूनी सहायता प्रदान करते हैं।

Property and Alimony Settlement

Divorce के दौरान संपत्ति (Property), Stridhan, और Alimony को लेकर विवाद हो सकता है।
हमारी टीम समझौते (Settlement Deed) के माध्यम से उचित और न्यायसंगत समाधान प्रदान करती है।

Why Choose Jaipur Legal Solution?

  • Experienced Family & Divorce Lawyers in Jaipur
  • Complete Confidentiality & Sensitivity
  • Transparent Fees & Clear Guidance
  • Expertise in High Court & Family Court Cases
  • 24×7 Legal Consultation on Call or WhatsApp

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Jaipur Legal Solution
📍 96, Agra Road, Prem Nagar, Jaipur, Rajasthan – 302031
📞 8302628278
🌐 www.jaipurlegalsolution.com

हम Divorce, Maintenance, Alimony और Child Custody जैसे मामलों में विशेषज्ञ हैं।
आज ही संपर्क करें और अपने अधिकारों की कानूनी रक्षा करवाएँ।

FAQ – Divorce in India

Q1. आपसी सहमति से तलाक कितने समय में हो सकता है?
👉 आमतौर पर 6 महीने से 1 साल में Mutual Consent Divorce पूरा हो जाता है।

Q2. क्या बिना सहमति के भी तलाक मिल सकता है?
👉 हाँ, अगर पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हों तो Contested Divorce फाइल किया जा सकता है।

Q3. क्या तलाक ऑनलाइन फाइल किया जा सकता है?
👉 कुछ चरण ऑनलाइन संभव हैं, लेकिन Final Hearing कोर्ट में ही होती है।

Q4. तलाक के बाद Maintenance कौन देता है?
👉 जिसकी आय अधिक होती है, उसे दूसरे पक्ष और बच्चों के Maintenance की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

Q5. क्या NRI तलाक केस Jaipur में फाइल कर सकते हैं?
👉 हाँ, हम NRI Divorce Cases में भी विशेषज्ञ सहायता प्रदान करते हैं।


Conclusion

तलाक का निर्णय कठिन जरूर होता है, लेकिन सही कानूनी मार्गदर्शन से आप अपने जीवन में नए सिरे से शुरुआत कर सकते हैं।
Jaipur Legal Solution में हमारे अनुभवी Divorce Lawyers आपकी हर कानूनी जरूरत को समझते हैं और कोर्ट प्रक्रिया को सरल बनाते हैं।

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