Regular Bail (रेगुलर बेल) – Complete Guide | Jaipur Legal Solution
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Regular Bail (रेगुलर बेल) क्या होता है?
जब किसी व्यक्ति को पुलिस किसी अपराध (Cognizable या Non-Cognizable) में गिरफ्तार कर लेती है, तो अदालत से उसकी रिहाई के लिए जो आवेदन किया जाता है, उसे Regular Bail कहा जाता है।
रेगुलर बेल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
- आरोपी मुकदमे के दौरान जमानत पर बाहर रहे,
- उसका ट्रायल जारी रहे,
- वह भागे नहीं,
- और साक्ष्यों, गवाहों को प्रभावित न करे।
Jaipur Legal Solution में हम हर तरह के बेल मैटर्स को सबसे तेज़ और प्रभावी तरीके से हैंडल करते हैं—चाहे मामला थाना, कचहरी, या हाई कोर्ट का हो।
Why Regular Bail is Important?
Regular Bail allows an arrested person to:
- घर वापस जाने की अनुमति
- नौकरी/व्यापार जारी रखने का मौका
- कोर्ट में पेशी के समय उपस्थित रहने की शर्त
- मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान से बचाव
बिना रेगुलर बेल, व्यक्ति को जेल हिरासत में ही रहना पड़ता है।
Types of Offences for Regular Bail
Regular Bail मुख्य रूप से दो तरह के मामलों में लगती है:
1. Bailable Offence (जमानती अपराध)
- पुलिस बेल दे सकती है
- कोर्ट जाना आवश्यक नहीं
- प्रक्रिया आसान होती है
2. Non-Bailable Offence (ग़ैर-जमानती अपराध)
- रेगुलर बेल कोर्ट से लेनी होती है
- कोर्ट केस की प्रकृति देखकर बेल देता है
- Criminal Lawyer की भूमिका यहां महत्वपूर्ण है
हम Non-Bailable Offence के बेल मामलों में विशेषज्ञ हैं।
Regular Bail कब और कहाँ लगती है?
| Stage | Description |
|---|---|
| Arrest के बाद | आरोपी को पकड़ने के बाद बेल लगती है |
| Magistrate Court | अधिकतर जिलों में बेल यहां लगती है |
| Sessions Court | Serious offences में Sessions Court |
| High Court | जब निचली अदालत बेल खारिज कर दे |
हम आपकी बेल पहले ही प्रयास में मंज़ूर कराने का प्रयास करते हैं।
Offences Covered for Regular Bail (हम किन मामलों में बेल करते हैं)
हम हर तरह के बेल मामलों में विशेषज्ञ हैं:
🔹 IPC Offences
- मारपीट (323, 324, 325)
- धमकी (506)
- घर में घुसकर मारपीट (452)
- दहेज (498A)
- चोरी, लूट, डकैती
- धोखाधड़ी (420)
- Cheque Bounce 138 NI Act
- Cyber Fraud Cases
- Sexual Offences (354, 376 – केस की प्रकृति अनुसार)
- Property Disputes से जुड़े Offences
- Attempt to Murder (307)
- NDPS Act (कम मात्रा और प्रोसीजरल ग्राउंड)
🔹 Special Acts
- NDPS Act
- POCSO Act
- Arms Act
- SC/ST Act
- IT Act
- Motor Vehicle Act
🔹 Family & Matrimonial Disputes
- 498A false case
- Domestic Violence बेल
- Family disputes से जुड़े FIR
Regular Bail Procedure (रेगुलर बेल प्रक्रिया)
Step 1: Case Study
- FIR की धारा देखना
- Sections Bailable/Non-Bailable
- Evidence कमजोरी
Step 2: Bail Application Drafting
हम strong grounds तैयार करते हैं:
- False implication
- कोई criminal background नहीं
- Arrest unnecessary
- Cooperation assured
- No risk of absconding
Step 3: Court Filing
- Magistrate Court
- Sessions Court
जहां उपयुक्त हो, वहीं आवेदन लगाया जाता है।
Step 4: Bail Arguments
हम बेल के लिए अदालत में मजबूत दलीलें प्रस्तुत करते हैं:
- Personal liberty (Article 21)
- Nature of offence
- Evidence contradiction
- Investigation complete
- आरोप सिद्ध नहीं
Step 5: Bail Order
बेल मिलने पर शर्तें तय की जाती हैं:
- Personal Bond
- Surety
- अदालत में पेशी
Documents Required for Regular Bail
- FIR कॉपी
- Arrest Memo
- Case Diary (Court से मिलती है)
- Identity Proof
- Address Proof
- Surety Details
- Affidavit
- Vakalatnama
Why Choose Jaipur Legal Solution for Regular Bail?
We are known as one of the Top Criminal Lawyers in Jaipur for bail matters.
✔ तेज़ और प्रभावी बेल प्रक्रिया
✔ Drafting से Argument तक पूरा प्रोसेस
✔ High Court, Sessions Court & District Court Expertise
✔ Non-Bailable और Serious Offence बेल विशेषज्ञ
✔ 24×7 Legal Support – Emergency Bail Cases
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Common Grounds on Which Court Grants Regular Bail
Court निम्न आधारों पर बेल देती है:
- FIR में Specific Role नहीं
- Evidence कमजोर
- Complaint देर से की गई
- Personal liberty का हनन
- Accused का clean background
- Investigation पूरी हो चुकी
- Trial लंबा चलेगा
- Civil dispute को Criminal बनाया गया
हम इन points को पूरी मजबूती से Court में प्रस्तुत करते हैं।
FAQs – Regular Bail (रेगुलर बेल)
Q1. Regular Bail कब लगती है?
जब व्यक्ति को arrest कर लिया जाए और वह कोर्ट से जमानत चाहता हो।
Q2. कितने समय में बेल मिल जाती है?
कई मामलों में उसी दिन, कुछ में 1–3 दिन लगते हैं।
Q3. क्या Murder, Rape, NDPS जैसे मामलों में बेल मिल सकती है?
हाँ, लेकिन case-to-case basis पर depends करता है और strong arguments की जरूरत होती है।
Q4. बेल होने के बाद क्या अलग से कोर्ट जाना पड़ता है?
हाँ, Court की date पर पेश होना जरूरी है।
Q5. क्या Regular Bail और Anticipatory Bail अलग हैं?
हाँ, Regular Bail arrest के बाद,
Anticipatory Bail arrest के पहले।
Conclusion
Regular Bail किसी भी आरोपी की आज़ादी, सम्मान, और कानूनी अधिकारों का पहला और महत्वपूर्ण कदम है। सही Criminal Lawyer आपका केस मजबूत बनाता है और बेल जल्दी मंज़ूर कराता है।
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